+91 96348 65111 desksaket@gmail.com

नमस्कार साथियों

साकेत द्वारा अंता, राजस्थान में 04-05 जून 2016 को  आयोजित समेकित जैविक खेती शिविर में राजस्थान, मध्य प्रदेश के लगभग 50-60 सक्रिय किसानों ने भाग लिया।

hisar-meeting-1

शिविर के प्रारम्भ में सभी प्रशिक्षणार्थियों ने अपना परिचय दिया। इसके पश्चात कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने भी अपने विचार रखे तथा मृदा के बारे में जानकारी दी। इसके पश्चात साकेत प्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण प्रारम्भ किया।

इस शिविर के पहले दिन पहले सत्र में किसानो को डॉ जितेंद्र सिंह ने साकेत संस्था की संक्षिप्त जानकारी देकर रासायनिक खेती के नुकसान बताते हुए समझाया कि रसायनों से हमने अपनी सम्पूर्ण खेती की व्यवस्था को ही चैपट कर लिया है। रासायनिक खेती में उपयोग होने वाले विविध प्रकार के रसायनों के स्थान पर जैविक खेती में मात्र एक देशी गाय और प्रकृति प्रदत्त पेड़ पौधों, मित्र कीटों और सूक्ष्म जीवों की सहायता से न्यूनतम खर्च से सफलतापूर्वक खेती की जा सकती है। उन्होंने जैविक खेती के सिद्धांत बताते हुए समझाया कि कैसे साकेत समेकित जैविक खेती अभियान से किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने खेती की साकेत थ्योरी और साकेत कृषि मन्त्र के बारे में बताया।

इसके बाद माननीय दशरथ जी ने मृदा पोषण और फसल पोषण के बारे में बताया। गोबर से खाद, नाडेप, वर्मी खाद आदि बनाने के बारे में विस्तार से समझाया गया। कम समय में जल्दी तैयार होने वाली मटका खाद, जीवामृत के बारे में भी किसानों को बताया गया। गोबर खाद के जैव उर्वरकों से शोधन की भी चर्चा की गई। वर्मी खाद, वर्मी वाश और जैव उर्वरक के बारे में प्रायोगिक रूप से सभी को प्रशिक्षण दिया गया।

सत्र के अंत में नितिन काजला जी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने सभी किसानों की जिज्ञासाओं का भी समाधान किया। इस तरह से पहले दिन सभी ने जैविक खेती का परिचय, मृदा संरचना, मृदा प्रबंधन, और फसल पोषण के बारे में जानकारी प्राप्त की।

कार्यशाला के दूसरे दिन फसल सुरक्षा के बारे में दशरथ जी द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने कई प्रकार के फसल सुरक्षा विकल्प जैसे येलो ट्रैप, लाइट ट्रैप, ट्रैप क्रॉप आदि के बारे में अच्छे से सामझया। न्यूनतम या शून्य खर्च पर कई प्रकार के जैविक कीटनाशक जैसे नीमॉस्त्र, अग्निअस्त्र, ब्रम्हास्त्र तथा जैविकक फफुंदनाशक दवा, आदि बनाने की और उनके उपयोग की जानकारी दी।

इसके बाद दशरथ जी ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट मॉडल फार्म के बारे में बताया। उनके द्वारा साकेत की मॉडल फार्म योजना, इसके अवयव और मॉडल फार्म का निर्माण कैसे हो, इस विषय पर प्रकाश डाला गया और प्रेजेंटेशन के माध्यम से साकेत द्वारा स्थापित मॉडल फार्म की जानकारियां भी प्रदान की गईं।

नितिन काजला जी ने जैविक सर्टिफिकेशन के तरीके और पी.जी.एस. की जानकारी प्रदान की। इसके बाद काजला जी ने साकेत की भविष्य की योजनाएं और किसानों द्वारा फसल उत्पादों के मूल्य संवर्धन के बारे में बताया। भोजन के बाद सभी किसान साथियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया।

बारां गायत्री परिवार से जुडे बांसगुड़ी गौशाला के प्रमुख व जैविक किसान श्री प्रभुदयाल नागरजी (सेवानिवृत अध्यापक) ने भी गाय के गोबर व गौमूत्र की सहायता से जैविक खेती करने से लाभ के अपने अनुभव बताये। उनकी गौशाला में प्रति वर्ष लगभग सात लाख रुपये का वर्मी खाद तैयार करके विक्रय किया जाता है। अंत में किसान भाइयों ने भी अपने अनुभव साझा किये।

अंत में अंता शहर के गणमान्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में सभी को प्रमाणपत्र वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। इस कार्यशाला के आयोजन में अंता के ललित गालव और कोटा, राजस्थान से आये हुए महेश कुमार मालव जी का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ।