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नमस्कार साथियों

11 फ़रवरी 2016 को साकेत टीम द्वारा रामपुर उत्तरप्रदेश में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। साकेत के क्षेत्रीय समन्वयक श्री राजपाल सिंह ने अपने गांव लोहरा टांडा में इस गोष्ठी का आयोजन कराया। इस गोष्ठी में रोहतक से आये प्रशिक्षक डॉ राजेन्द्र चौधरी ने किसानों को विषमुक्त कुदरती खेती के गुर सिखाये। गोष्ठी में 100 से ज्यादा किसानों ने हिस्सा लिया।

डॉ राजेन्द्र चौधरी ने सबसे पहले पशु मूत्र को इकठ्ठा करने पर जोर दिया क्योंकि ये खुद में बहुत अच्छा खाद का कार्य करता है। साथ ही गोबर के ढेर को भी सही तरीके से खाद में बदलने के तरीके बताये। डॉ चौधरी ने बताया की गोबर की ढेरी को कभी भी खुले में न डालें। गोबर की ढेरी को 4 फुट से ज्यादा चौड़ी न बनाए और हर फ़ीट ऊंचाई के बीच में मिटटी की परत भी डालते रहें। अधिकतम ऊंचाई भी 4 फ़ीट ही रखें। साथ ही हर दो महीने में ढेर की पलटाई कर दें। पलटाई कर देने से गोबर 6 से 9 महीने में अच्छी खाद में परिवर्तित हो जायेगा।
अपनी वार्ता के अगले क्रम में डॉ चौधरी ने किसानो को जीवामृत, नीम आधारित कीटनाशक, मट्ठे के फफुंदीनाशक आदि बनाने भी सिखाये और इनका समय समय पर प्रयोग भी बताया।

इसके बाद साकेत संस्था के सचिव मोहम्मद फहीम ने संस्था की उत्पत्ति के कारण और कार्यशैली के बारे किसानों को बताया। फहीम जी ने ग्रामीण रोजगार की चर्चा करते हुए नौजवानों को मिल रही सरकारी योजनाओं की चर्चा की और खाद्यान्न प्रसंस्करण की सम्भावनाओं के बारे में भी बताया।
जहाँ डॉ राजेन्द्र चौधरी ने विषमुक्त खेती कैसे करे पर प्रशिक्षण दिया वहीं साकेत के चैयरमेन नितिन काजला ने विषमुक्त खेती के लाभों पर चर्चा की। श्री काजला ने बताया कि किस तरह से हमारे उत्पाद रोज जहरीले होते जा रहे हैं और इन्हें खाकर हम बीमार होते जा रहे हैं। काजला जी ने निवेदन किया की हमें अपने खाने के खाद्यान्न को तो विषमुक्त ही उगाना चाहिए बेशक शुरुआत में उत्पादन कम भी आये। उन्होंने बताया कि अगर तरीके से विषमुक्त खेती की जाए तो उत्पादन पहले ही वर्ष पूरा लिया जा सकता है। काजला जी ने अपने अनुभव भी साझा करते हुए बताया कि पहली बार में ही प्राकृतिक तरीके से उत्पादित उनके बासमती धान के उत्पादन औसत 21 कु/एकड़ को काफी सराहा गया।

इसके बाद बिजनौर उत्तरप्रदेश से आये कुदरती खेती करने वाले किसान शूरवीर सिंह जी ने भी अपने अनुभव साझा किये। शूरवीर सिंह जी ने देशी गाय के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वो 1990 से ये खेती करते हैं और हर फसल का पूर्ण उत्पादन लेते हैं, साथ ही उनका उत्पाद उनके खेत से ही शहरों से आने वाले ग्राहक ले जाते हैं और अच्छा दाम भी देकर जाते हैं।

गोष्ठी खत्म होने के बाद भी किसानों ने मो. फहीम और नितिन काजला को घेरे रखा और संस्था से जुड़ने की इच्छा जताई। किसानों ने अपनी खेती सम्बंधित अन्य कई समस्याएं भी बताईं जिनका दोनों के द्वारा समुचित समाधान भी बताया गया। दोनों साकेत प्रतिनिधियों से प्रेरित होकर किसानों ने अपने परिवार के खाने के लिए विषमुक्त उगाने का प्रण भी किया।