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Dr D K Payasi Sagar MP:

  • किसी भी पौधे का वह भाग जो भारतीय बीज अधिनियम 1966 और भारतीय बीज प्रमाणीकरण स्टैण्डर्ड के मानकों के अनुसार स्वस्थ पौधे को जन्म देता है बीज कहलाता है।
  • बीज मुख्यरूप से 4 प्रकार से है। नाभिकीय, प्रजनक, आधार, प्रमाणित और आजकल TFL बीज को भी मान्यता दी गयी है यदि पैकेट में सभी मानको को उल्लेखित है
  • संकर बीज की अवधारणा अलग है उसे बतायेगे, पहले मूल बात को पूरी कर ले।
  • नाभिकीय बीज। 100 % शुद्ध, कम मात्रा में प्रजनक द्वारा ही तैयार किया जाता है । इससे प्रितृत्व बीज भी कहेंगे क्योकि इसी से प्रजनक बीज तैयार किया जाता है।
  • कल बीज की श्रेणियों पर चर्चा हुई थी क्या किसी भी को कोई जिज्ञासा है उस में।

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • सर TFL क्या है
  • Truthful?
  • सर हम बाजार से किसी कम्पनी का बीज लाये  उस पर लिखा है  Truthful seed F1 hybrid इससे क्या समझें सर

Dr D K Payasi Sagar MP:
सत्य रूप बीज। बीज की एक श्रेणी है जहाँ पर सरकारी तंत्र फ़ैल हो जाता है।
Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • ओह
  • सर सत्य बीज को थोडा समझाएं प्लीज

Dr D K Payasi Sagar MP:
नितिन जी , परपरागित फसलो में दो अलग अलग पौधों को परागित कर श्रेठ पौधे के बीज को F1 कहते है

Nitin Kajla, Meerut (UP):
ओके सर

Dr D K Payasi Sagar MP:

  • इसके लिए दो शब्द महत्त्वपूर्ण है। GCA और SCA
  • GCA मतलब जनरल कॉम्बिनिंग एबिलिटी जो स्वपरागित पौधों में महत्त्वपूर्ण मानक है
  • SCA, स्पेसिफिक कॉम्बिनिंग एबिलिटी जो परपेआगित फसलो में म्हहत्वपूर्ण मानक है हटेरोसिस का।

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • स्व परागीत मतलब जिनके मेल फीमेल एक ही पुष्प में होते हैं
  • पर परागीत मतलब मेल फीमेल पुष्प अलग हैं और इन्हें प्रागण को माध्यम चाहिए
  • सही है सर?

Dr D K Payasi Sagar MP:
जब कोई पौधा अपने प्रित्त्व पौधे नर और मादा से ज्यादा उपज देता है तो वह उसकी हेट्रोरोसिस हुई। यह प्रतिशत में गणना की जाती है। जैसे धान में 25-40 प्रतिशत देखि गयी है

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • मतलब दो गेहूं 
  • एक 20 कु का 
  • दूसरा 22 का 
  • न्य बीज बना और 28 कु का उत्पादन हुआ

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • पर गेहूं तो स्वप्रागित है सॉरी 
  • कोई पर परागीत में समझाइये

Dr D K Payasi Sagar MP:
धान पर ही बात करते है। इसमें 5 प्रतिशत तक प्रप्रगन होता है यही कारण है कि संकर प्रजाति बन सकी। और गेहू में फूल की सरंचना ऐसी है कि प्रप्रगन नही होता इसलिए नही बन सका कोई संकर

Nitin Kajla, Meerut (UP):
ओके

Dr D K Payasi Sagar MP:
कैसे बनता है संकर धान। क्या इसपे चर्चा कर

Nitin Kajla, Meerut (UP):
बिल्कुल सर

Dr D K Payasi Sagar MP:
ओके

Dr D K Payasi Sagar MP:

  • इसके लिए 3 तरह के पौधे बनाने होते है जो की एक मुल्कील प्रक्रिया है।
  • इसमें पहला पौधा बनाते है जिसे A लाइन कहते गई। पूरी तरह बंध्यय (sterile) होता है मतलब माइटोकांड्रिया या केन्द्रक में ही ऐसा गुन है की जिससे भी प्रागण करो मिलेगा स्टेराइल पौधा।
  • दूसरा पौधे जिसे बी लाइन कहते है जो केवल बंध्यता को छोड़ कर बाकि सभी लक्षणों में A लाइन जैसा ही होता है(इसोगेनिक लाइन) और र् लें को हमेशा बंध्यय बनाये रखने के गुण को मेन्टेन करता है। इसलिए इसे मेंटेनर लाइन कहते है।
  • अब कोई भी ऐसी प्रजाति या गेरम्पल्सम को पहचानते है जिसमे 85 % से ज्यादा बीज बनाने की क्षमता होती है। इसे रेस्टोरेर लें कहेंगे । इसमें बीज बनाने की क्षमता होती है

Nitin Kajla, Meerut (UP):
ओके

Dr D K Payasi Sagar MP:

  • फिर A x R  2 लाईन र् की और 6 लाइन R कि लगाये है
  • लगाते है खेते में और प्रगम के समय R का परागकण A में लंबी रस्सी के सहरे दाल देते है। जिससे A लें में बीज बन जाता है। और यही बीज F1बीज के रूप में बाजार में आता है।

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • ओह 
  • अब एक बात बताएं क्या ये प्रक्रिया हर बार करनी होती है या 
  • F1 से से ही अगला बीज बन जायेगा

Dr D K Payasi Sagar MP:
कुल मिलाकर जैसे हमारे अधिकांश गुण हमारी माता से आते है पिता से नही। यही विधी इसमें भी लागू होती है। और इसे सीयटोप्लास्मिक जेनेटिक मेल स्टेरिलिटी सिस्टम से संकर बीज का उत्पादन कहते है

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • मतलब A की दो लाइन और R की 6
  • बी कहाँ गया सर

Dr D K Payasi Sagar MP:
जो बड़ा है वो रेस्टोरेर है जो छोटा वो CMS लाइन

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • ओके बड़ा a*R है
  • इसलिए इसे रेस्टोरर कहा

Dr D K Payasi Sagar MP:
बी का उपयोग A की बंध्यता के गुण को मेन्टेन करने के लिए होता है केवल।

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • जी
  • तो ये प्रोसेस हर बार होगा फ1 के लिए?
  • या इससे प्राप्त फ1 से बीज बना सकते हैं?

Dr D K Payasi Sagar MP:

नही। R में फेर्लिटी का gene दमिनंत है इसलिए 85 %से ज्यादा बीज बनाने की क्षमता वाले को ही लेते है

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • डोमिनेंट है 
  • ओके

Dr D K Payasi Sagar MP:

हा। इसीलिये फ1 महंगा रहता है

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • ओके चूँकि प्रक्रिया जटिल है इसलिए मेंहगा है 
  • थैंक्स सर
  • ये भी क्लीयर हुआ की फ1 से दुबारा बीज क्यों नहीं बन पाटा
  • सर देशी उन्नतहाइब्रिड को भी समझाओ

Dr D K Payasi Sagar MP:

स्टेरिलिटी के लिए जिम्मेदार जीन cytoplasm या mitochondria में होता है जबकि फर्टिलिटी के लिए केन्द्रक में और dominant Rr

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • एक सवाल पहले में ही
  • सर क्या ऊपर चर्चित फ1 हाइब्रिड में भी न्यूक्लियस ब्रीडर फाउंडेशन होंगे 
  • शायद नहीं ?

Dr D K Payasi Sagar MP:

  • Hybrid to yhi hua jo upar hai, bs हर फसल का अलग अलग है, किसी में 2 लाइन का किसी में 3 लें वाला।
  • देशी बीज हमारा दशकों पुराण परंपरागत बीज है। जो हमारे पूर्वजों ने बचा के भविय के लिए रखा है। इसमें कीट, व्याधि, ओला, पाला, सूखा, ठण्ड, तापमान सभी को सहने की क्षमता होती है बस उत्पादन बहुत कम होता है।
  • उन्नत बीज बनाने की प्रक्रिया में इन्ही को नर ता मादा के रूप में इस्तेमाल कर नई किस्मो को विकसित किया जाता है, जिसमे मूल गन देशी का और उत्पादन बढा हुआ होता है।
  • जैसे गेहू C 306 है, अछि चपाती के लिए देश में प्रशिद्ध है। आज की आश्यकता है कि सी306 की चपाती वाला गन बना रहे और किसान को उत्पादन भी प्रति एकड़ ज्यादा मिले । तो ज्यादा उत्पादन वाले से क्रॉस कराकर 10 सालो तक C 306 के मूल पौधे का चयन करते जाये है , जैसी समय की आवश्यक्ता होती है।

Nitin Kajla, Meerut (UP):
सर लेकिन ऐसा कैसे हुआ के हमने उन्नत किस्म तो देशी के जीन से ही बनाई पर स्वाद नहीं रहा देशी जैसा और इम्युनिटी भी नहीं रही
दलहन में खासकर

Dr D K Payasi Sagar MP:

उत्पादन की प्रकिया में रसायन का इस्तेमाल ज्यादा हुआ

Nitin Kajla, Meerut (UP):
मतलब रसायनों के प्रयोग से स्वाद खो गया सर

Dr D K Payasi Sagar MP:
दूसरा। कारण, मेडेलिन इनहेरिटेंस। जब क्रासिंग होगी तो 3 तरह के पौधे मिलेंगे 1 कि 306 की तरह, दूसरे जिससे क्रासिंग की है उसकी तरह और 50 % इंटरमीडिएट जिसमे दोनों के गुण हो आधा आधा। प्रजंकिसी 50 प्रतिशत पर ही काम कर कि 306 में उपज के गुण को चयन कर आगे बढ़ता जाता है

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • तो क्या 306 के स्वाद वाले जीन लेकर उत्पादन बढ सकता हैं
  • एक और सवाल सर 
  • धान की किस्में (जो फ1 नहीं हैं) जैसे 1121,1509,1612 आदि उन्नत कहलाएंगी?

Dr D K Payasi Sagar MP:
बिलकुल ये उन्नत ही है

Nitin Kajla, Meerut (UP):
गेहूं की अब तक उपलब्ध hd 2967, 3086 भी उन्नत ही हैं

Dr D K Payasi Sagar MP:
ये संकर नही है।

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • ओके
  • दलहन में अरहर को छोड़ बाकी सब उन्नत ही हैं फिर तो

Dr D K Payasi Sagar MP:
बायर 6444, PHB 71 ये संकर है धान की

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • अब तक कोण कोण से अनाज फ1 में आये हैं सर 
  • एक तो धान हुआ
  • लगता है सब्जियों में ज्यादा फ1 हैं

Dr D K Payasi Sagar MP:

  • अरहर में भी सभी उन्नत ही है, केवल ICPH को छोड़कर
  • हा नितिन जी
  • अधिकांश में आ गए है।

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • सर उन्नत बीज किसान कब तक प्रयोग करे ताकि उत्पादन क्षय न हो 
  • अगर ब्रीडर मिले तो कितने साल चलाये

Dr D K Payasi Sagar MP:

  • 3 साल, और यदि मूल पौधे की सरंचना को समझ ले तो जिनगी भर
  • शुद्धता आवश्यक है

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • दूसरा स्टेटमेंट ये बना लिया जाए 
  • अगर किसी किस्म की ब्रीडर सर्टिफाइड या फाउंडेशन सीड है तो वह उन्नत किस्म है न की हाइब्रिड

Dr D K Payasi Sagar MP:
नही

Nitin Kajla, Meerut (UP):
तो?

Dr D K Payasi Sagar MP:
संकर में भी फाउंडेशन और सर्टिफाइड है

Nitin Kajla, Meerut (UP):
ओक

Dr D K Payasi Sagar MP:
कपास सूरजमुखी, ज्वर बाजार

Nitin Kajla, Meerut (UP):
मतलब फाउंडेशन से सर्टिफाइड बनता है क्या?

Dr D K Payasi Sagar MP:

  • ये बीज की श्रेणी है, Br, F/S और कC/S
  • हा, फाउंडेशन पिता है और सर्टिफाइड पुत्र और ब्रीडर दादा

Nitin Kajla, Meerut (UP):

तो किसान लेबल देखकर कैसे पता करे की बीज उन्नत है या सनकर है

Dr D K Payasi Sagar MP:
यदि F1 है तो संकर,

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • और सनकर के सर्टिफाइड को कैसे लिखा जायेगा
  • फ1 मतलब क्या 
  • फाउंडेशन 1?

Dr D K Payasi Sagar MP:

नही, फर्स्ट फिलिएल generation

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • ओके
  • फ1= फिलियल 1

Dr D K Payasi Sagar MP:
Ji

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • अब ये बताओ सर 
  • मैं tjt 501 का न्यूक्लियस या ब्रीडर कैसे बनाउन

Dr D K Payasi Sagar MP:

  • पुरे पौधे को देखकर
  • प्रारागन के समय कुछ पौधों में मच्छरदानी पहना दो

Nitin Kajla, Meerut (UP):

क्या ये बेहतर होगा की जब न्यूक्लियस बनाना हो तो ब्रीडर सीड इस्तेमाल किया जाये?

Dr D K Payasi Sagar MP:

  • पृथकर्ण दुरी होनी चाहिए 200 मीटर एक अरहर के दूसरे अरहर के खेत से
  • उल्टा जा रहे हैं
  • नुक्लेस से ब्रीडर

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • सर वो ठीक है। रुकिए लिखता हु।
  • मैंने धान के वैज्ञानिक से चर्चा की थी 
  • उन्होंने समझाया की हम जब ब्रीडर बोते हैं तो उसमें से कुछ इडेंटिकल प्लांट्स तो चूज करके उनकी पूरी बाल को पेपर एनवल्प में रख लेते हैं 
  • बाकी फसल को फाउंडेशन सीड मव बेच देते हैं 
  • अगले साल इन पेपर एनवल्प से बाल निकल कर पूरी बाल एक साथ बोते हैं 
  • सब बाल अलग अलग स्थान पर बोते हैं 
  • फिर एक बाल की नर्सरी को एक लाइन में लगाते हैं 
  • दूसरे बाल की दूसरी लाइन में 
  • माना 100 लाइन में लगाई 
  • अब इन लाइन को वाच करते हैं 
  • जो भी अन इडेंटिकल होंगी उन्हें हटाते रहेंगे 
  • औसतन 18,20 लाइन इडेंटिकल बचती हैं 
  • इनका बीज हम न्यूक्लियस बीज कहते हैं और इससे ब्रीडर बनाते हैं 
  • इस सारी प्रोसेस में जो मदर सीड था वो ब्रीडर था 
  • क्या इस प्रोसेस में कहीं मिस्टेक हैं

Dr D K Payasi Sagar MP:
सिंगल प्लांट से ही करते है पर पापुलेशन से। यदि जगह कम है तो बीडर से भी क्र सकते है।

Nitin Kajla, Meerut (UP):
सर इसमें अगर न्यूक्लियस सीड को बोकर ही न्यूक्लियस लिया जा सकता है?

Dr D K Payasi Sagar MP:
हर साल सिंगल प्लांट सेलेक्ट करते है मन 500 पौधे किये , अब इन्हें कतार में लगाएंगे, जो कतार मूल प्रजाति के गुणों से भिन्न होगी उसे रिजेक्ट करेगे और बाकि को अगेन 500 SPS निकल के नुक्लेस बना लेंगे।

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • अब तक की चर्चा पर प्रश्न लेंगे पयासी सर?
  • प्रश्न पुछ लो साथियों
  • डॉ साहब से जो भी पूछना हो

Dr D K Payasi Sagar MP:

  • बीज कुछ भी नही, पढ़े लिखो ने व्यापारियों को किसानों को लूटने के लिए एक शब्द दे दिया जो उनकी विफलता का परिचायक मात्र है।
  • इस साल किसानों से 2000 कुन्तल अलसी गवाने का लक्ष्य है, जिससे देश में अलसी के शुद्ध बीज की मांग को पूरा किया जा सके। बिना किसी टैग के। सब फील्ड मई खुद जाके देखूंगा, सागर के ।

Nitin Kajla, Meerut (UP):

सर किसान बीज खरीदते समय क्या क्या सावधानी रखे 
लेबल पर क्या क्या ध्यान दे

Dr D K Payasi Sagar MP:
सरकारी टैग के ऊपर की सिलाई एक बार से ज्यादा न हो।

Aasuram Godara Bknr Rj:

  • सर मेरे मोठ के खेत में पाँच छः पोधे ऐसे थे जिनमें दुसरे पोधो से तीन चार गुना फलिया ज्यादा थी और उन पोधो की बढ़ोतरी भी दुसरे पोधे से दुगुनी थी 
  • और ये बीज में मैं पिछले आठ दस साल से काम ले रहा हूँ 
  • तो क्या इन पाँच छः पोधे के बिज को आगे अलग लगाऊ या मेरे परम्परागत बीज के पास लगा सकता हूँ??

Rajesh Kumar:
गोदारा साहब इनको अलग लगा के देखो

Nitin Kajla, Meerut (UP):

  • बिलकुल करिये 
  • ये नेचुरल म्युटेशन भी हो सकता है जो रिवर्ट हो जाए मतलब अगली बार इतनी ग्रोथ न आये 
  • और अगर तीन साल लगातार ऐसी ही ग्रोथ आई तो 
  • आसू भाई के नाम नया बीज होगा
  • 3 या 7 साल देखना होता है

Aasuram Godara Bknr Rj:
इसको मेरा जो बिज हैं उसके पास लगा सकता हूँ या बिच में कोई दुसरी फसल

+91 99291 14592‬:
आज तो डा साहब की जानकारी से हम धन्य हो गये और अगर इस ग्रुप मे नहीं होते तो सायद ही यह जानकारी हमे मिल पाती आप सभी का धन्यवाद। व् डा साहब व् नितिन जी का आभार जो की उनके माध्यम से हमको यह जानकारी मिल पाई।

Dr D K Payasi Sagar MP:
बिलकुल। आप इस पौधों को अलग से कटे सुखाये और अगले साल ल्फाये फिर देखे। क्या फलिया आपको ज्यादा मिल रही है

‪+91 99771 14556‬:
डॉ पयासी सर आपके द्वारा दि जा रही जानकारियाँ तो अच्छी लगी लेकिन आपका किसानों के प्रति समर्पण देख कर तो धन्य हो गए 
जय हो डॉ साब की

Dr D K Payasi Sagar MP:
गेहू की उत्पादकता मेरे हिसाब से बेहतर सस्य प्रबंधन में निर्भर करती है। गेहू की उपज गोबर की खाद के साथ बहुत अच्छा पैदावार देती है